कलम रुकती नहीं...

Anonymous 16 दिन पहले 👁 62
कभी ख़यालात लिखती है,
कभी हालात लिखती है।।
 
अच्छे को और अच्छा,
बुरे को बेकार लिखती है।।
 
तेरी सोच से कहीं ऊपर,
तेरा किरदार लिखती है।।
 
ख़ुद की क़लम रुकती नहीं,
हर रोज़ बे-हिसाब लिखती है।।